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आईजीयू में ‘स्वयं की दक्षताओं को बढ़ाने एवं सकारात्मक कार्य संस्कृति को प्रोत्साहित करने’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित।

Published on: 24 Oct 2026

इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर, रेवाड़ी के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) द्वारा ‘स्वयं की दक्षताओं को बढ़ाने एवं सकारात्मक कार्य संस्कृति को प्रोत्साहित करने’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक के पूर्व कुलसचिव प्रो. गुलशन तनेजा ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. असीम मिगलानी, परीक्षा नियंत्रक डॉ. विपुल यादव तथा आईक्यूएसी के निदेशक प्रो. विकास बत्रा विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के प्रारंभ में कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने मुख्य वक्ता प्रो. गुलशन तनेजा का स्वागत किया। अपने संबोधन में कुलपति ने कार्यस्थल पर समय की पाबंदी, कर्तव्यनिष्ठा, समर्पण तथा टीम भावना के साथ कार्य करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान की प्रगति के लिए कर्मचारियों का अनुशासित, सकारात्मक और सहयोगात्मक दृष्टिकोण आवश्यक है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कार्यशाला से प्राप्त विचार एवं सुझाव विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने तथा सकारात्मक कार्य संस्कृति विकसित करने में सहायक सिद्ध होंगे।

मुख्य वक्ता प्रो. गुलशन तनेजा ने अपने संबोधन में प्रभावी कार्य संस्कृति विकसित करने, सकारात्मक सोच बनाए रखने तथा उपलब्ध समय का उचित उपयोग करने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कर्मचारी को अपने संगठन की कार्य संस्कृति, उद्देश्यों, नियमों और अपेक्षाओं के प्रति जागरूक रहना चाहिए। कार्य के प्रति जिम्मेदारी, समय प्रबंधन, आपसी समन्वय तथा कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना संस्थागत दक्षता बढ़ाने के महत्वपूर्ण आधार हैं।

उन्होंने मोबाइल फोन के अनावश्यक एवं अत्यधिक उपयोग को नियंत्रित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, कार्यस्थल पर एकाग्रता बनाए रखने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए डिजिटल उपकरणों का सीमित एवं उद्देश्यपूर्ण उपयोग आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने कार्य के दौरान होने वाली थकान के प्रबंधन, मानसिक सजगता तथा सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने के व्यावहारिक उपायों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रेरित किया कि वे अपनी व्यक्तिगत दक्षताओं में निरंतर सुधार करते हुए संगठन के लक्ष्यों की प्राप्ति में सक्रिय योगदान दें।

परीक्षा नियंत्रक डॉ. विपुल यादव ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए समय प्रबंधन, कार्यों के प्रति समर्पण तथा निर्धारित दायित्वों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की प्रशासनिक एवं शैक्षणिक व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए प्रत्येक कर्मचारी का उत्तरदायित्वपूर्ण योगदान महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. रीना हुड्डा ने किया। अंत में आईक्यूएसी के निदेशक प्रो. विकास बत्रा ने मुख्य वक्ता, विश्वविद्यालय के अधिकारियों तथा कार्यशाला में उपस्थित सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर उप-कुलसचिव, स्थापना शाखा डॉ. संजीव कुमार, उप-कुलसचिव, शैक्षणिक शाखा मोहित रेवड़ी, उप-कुलसचिव डॉ. नवीन पिपलानी सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों एवं शाखाओं के गैर-शिक्षक कर्मचारी उपस्थित रहे।

कार्यशाला का उद्देश्य कर्मचारियों में सकारात्मक कार्य दृष्टिकोण विकसित करना, व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक दक्षताओं को सुदृढ़ करना तथा विश्वविद्यालय में समयबद्धता, अनुशासन, सहयोग और प्रभावी कार्य संस्कृति को बढ़ावा देना रहा।